Saturday, December 9, 2017

14415 Indian Army soldiers martyred in 10 years : RTI

10 सालों में भारतीय सेना के 14415  जवान शहीद : आरटीआई खुलासा l  


लखनऊ/10 दिसम्बर 2017

News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News *Exclusive ©yaishwaryaj


यूपी की राजधानी लखनऊ निवासी  देश के जानेमाने आरटीआई एक्सपर्ट और इंजीनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई अर्जी पर जवाब देते हुए भारतीय सेना ने बताया है  कि साल 2008 से लेकर इस साल बीते 01 नवम्बर तक बैटल कैजुअलटी में 1228 और फिजिकल कैजुअलटी में 13187 जवान शहीद हो चुके हैं। इस तरह पिछले 10 सालों में 14415 जवान देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर चुके हैं l  बीते सितंबर महीने में  संजय शर्मा द्वारा रक्षा मंत्रालय को भेजी गई आरटीआई एप्लीकेशन पर एकीकृत मुख्यालय  रक्षा मंत्रालय ( सेना ) के लेफ्टिनेंट कर्नल और जन सूचना अधिकारी ए. डी. एस. जसरोटिया ने बीते 13 नवम्बर के पत्र के माध्यम से यह जानकारी सार्वजनिक की है।


अपने प्राणों की परवाह न करते हुए देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ देश को अंदरूनी अंतर्द्वंदों से निजात दिलाने वाले सैनिकों को ही रियल हीरो मानने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने यह आरटीआई अर्जी देकर पिछले 10 सालों में सेना के अंगवार यानि कि थल सेना, जल सेना और वायु सेना के ऑन ड्यूटी शहीद हुए सैनिकों की वर्षवार सूचना माँगी थी l  थल सेना ने संजय को सूचना दे दी है जबकि जल सेना और वायु सेना से सूचना मिलना अभी शेष है l



आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि पिछले 10 सालों में बैटल कैजुअलटी में किसी 1 साल में सबसे ज्यादा 311 जवान साल 2008 में शहीद हुए और सबसे कम 74 जवान साल 2013 में शहीद हुए l इस साल अब तक 81 जवान बैटल कैजुअलटी में अपनी जान गवां चुके हैं l संजय को यह भी बताया गया है कि 10 सालों में फिजिकल कैजुअलटी में किसी एक साल में सबसे ज्यादा 1530 जवान साल 2010 में शहीद हुए और सबसे कम 1250 जवान साल 2015 में शहीद हुए l इस साल अब तक 876 जवान फिजिकल कैजुअलटी में अपनी जान गवां चुके हैं l इस तरह इस आरटीआई से यह खुलासा हुआ है कि पिछले 10 सालों में किसी 1 साल में सबसे ज्यादा 1720 जवान साल 2010 में  ऑन ड्यूटी शहीद हुए और सबसे कम 1359 जवान साल 2013 में ऑन ड्यूटी शहीद हुए l इस साल अब तक 957 जवान ऑन ड्यूटी अपनी जान गवां चुके हैं l



मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय काम करने वाले और पेशे से इंजीनियर संजय शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार को एक विशेष बातचीत में बताया कि इस प्रकार पिछले दस सालों में प्रतिवर्ष औसतन 123 जवान बैटल कैजुअलटी में , 1319 जवान फिजिकल कैजुअलटी में और इस प्रकार कुल 1442 जवान ऑन ड्यूटी  शहीद हो रहे हैं l संजय का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अगर साल 2016 को छोड़ दें तो साल 2012 से अब तक प्रतिवर्ष शहीद होने वाले कुल सैनिकों की संख्या पिछले 10 सालों  के औसत से कम रही है l संजय के अनुसार उन्होंने आरटीआई इसलिए दायर की थी क्योंकि वे देश को बताना चाहते थे कि  देश को सुरक्षित रखने और देश में अमन चैन कायम रखने के लिए आखिर हमें  कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है l 

संजय को दी गई वर्षवार सूचना पर एक नज़र ->

Year
Battle Casualty
Physical Casualty
Total
8
311
1323
1634
9
114
1464
1578
10
190
1530
1720
11
76
1423
1499
12
85
1350
1435
13
74
1285
1359
14
77
1307
1384
15
109
1250
1359
16
111
1379
1490
17
81
876
957
Total
1228
13187
14415


नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बीते बुधवार हुए  केन्द्रीय सूचना आयोग के 12वें वार्षिक सम्मेलन में “मामले से लेना-देना रखने वाले लोगों को ही आरटीआई मांगने देने की  प्रणाली विकसित करने” की बात करने के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के बयान की भर्त्सना करते हुए एक्टिविस्ट संजय ने कहा है कि मौका मिलने पर वे सिंह से इस सबाल का उत्तर जानना चाहेंगे कि यदि उनकी मनचाही हुई तो क्या इस आरटीआई जैसी जनहित की आरटीआई दायर हो पाएंगी और क्या तब सैनिकों की शौर्यगाथा के ऐसे खुलासे हो पाएंगे ?



संजय ने बताया है कि वे देश के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग करेंगे कि सैनिकों की साहसिक अमर गाथा की यह जानकारी सैनिकों के नाम के साथ नियमित समय अंतराल पर जनता को सार्वजनिक तौर पर दी जाए । 

Find original RTI & its reply at exclusive weblink http://upcpri.blogspot.in/2017/12/1442-10-14415-rti-l.html


News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News *Exclusive ©yaishwaryaj 

Thursday, December 7, 2017

PM मोदी ने तोड़े सेना गोला-बारूद खरीद के 6 साल के रिकॉर्ड : RTI खुलासा l


 

 

News Summary सुरक्षित हैं हम : मोदी सरकार ने इस साल तोड़ दिए हैं सेना के गोला बारूद की खरीद के पिछले 6 साल के सारे रिकॉर्ड - संसद में पेश कैग रिपोर्ट से भारतीय सेना के पास गोला बारूद की कमी के खुलासे के बाद जागी केंद्र सरकार का सराहनीय कदम : एक्टिविस्ट संजय शर्मा  की आरटीआई से हुआ खुलासा l 


Get complete details & original RTI at http://upcpri.blogspot.in/2017/12/6-l.html


लखनऊ/07 दिसम्बर 2017

News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News Exclusive ©yaishwaryaj



बीते जुलाई महीने में भारत की संसद में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने यकायक पूरे भारतवर्ष को चिंता में दाल दिया था l इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर भारत सरकार के साथ-साथ देश के हर नागरिक का चिंतित होना स्वाभाविक ही था क्योंकि मामला चीन और पाकिस्तान सीमा पर आये दिन सैन्य कार्यवाहियां करती देश की बहादुर सेना के पास गोला-बारूद की भारी कमी होने की बात कैग की इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कही गई थी l कैग द्वारा इस साल जनवरी में सेना के गोला-बारूद प्रबंधन का विश्लेषण करने के बाद डी गई इस रिपोर्ट में तोपखाने और टैंकों के लिए गोला-बारूद,मिसाइल और दूसरे विस्फोटकों में इस्तेमाल होने वाले  इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज़ आदि की गंभीर रूप से किल्लत होने की बातें भी कहीं गईं थीं l साफ-साफ कहें तो इस रिपोर्ट में आंकलन किया गया था कि अगर भारतीय सेना को 10 दिनों तक लगातार युद्ध करना पड़ता तो उसके पास पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद उपलब्ध नहीं था lरिपोर्ट में बताया गया था कि किसी ऑपरेशन की अवधि की जरूरतों के हिसाब से रक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित 40 दिन की अवधि का “वॉर वेस्टेज रिज़र्व” रखा जाना और साल 1999 में भारतीय सेना द्वारा तय किया गया कम से कम 20 दिन का गोला-बारूद रिज़र्व होना आवश्यक था पर सितंबर 2016 में पाया गया था कि लगभग 55% प्रकार के गोला-बारूद की उपलब्धता MARL (Minimum Acceptable Risk Level) से कम थी यानि कि इन प्रकारों के गोला-बारूद की उपलब्धता न्यूनतम अपरिहार्य आवश्यकता परिचालन की ज़रूरत के हिसाब से नहीं था  l  इसके अलावा CAG ने 40%  प्रकार के गोला-बारूद की गंभीर रूप से कमी भी पाई थी जिनका तकरीबन 10 दिन का ही स्टॉक था l



पर अब देश और इसके नागरिकों को चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है l आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड एक्टिविस्ट और इंजिनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई पर भारत के सेना मुख्यालय के जबाब से यह राहत भरा खुलासा हुआ है कि  नरेंद्र मोदी की अगुआई में चल रही केंद्र सरकार ने इस साल सेना के हथियार और गोला-बारूद की खरीद के मामले में पिछले 6 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं l




एक्टिविस्ट संजय शर्मा द्वारा बीते 04 सितम्बर को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में दायर की गई आरटीआई पर एकीकृत मुख्यालय  रक्षा मंत्रालय ( सेना ) के लेफ्टिनेंट कर्नल और जन सूचना अधिकारी ए. डी. एस. जसरोटिया ने बीते 13 नवम्बर के पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि Arms & Ammunitions की खरीद पर जहाँ एक तरफ भारतीय सेना नें वित्तीय वर्ष 2011-12 में 25.85 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2012-13 में 4,051.35 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2013-14 में 10,394.37 Cr. रुपये,वित्तीय वर्ष 2014-15 में 3,802.41 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2015-16 में 3,427.97 Cr. रुपये,वित्तीय वर्ष 2016-17 में 11,348.92 Cr. रुपये ही खर्चे थे तो वहीं दूसरी तरफ हालिया वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुरुआती 7 महीनों में  भारत सरकार 31 अक्टूबर तक  ही 28,303.43 Cr. रुपये खर्च कर चुकी है l 




पेशे से इंजीनियर संजय शर्मा बताते हैं कि इस सूचना से स्पष्ट है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के अंतिम तीन वर्षों में भारतीय सेना ने Arms & Ammunitions की खरीद पर 14471.57 Cr. रुपये खर्चे थे तो वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के आरंभिक तीन वर्षों में भारतीय सेना ने Arms & Ammunitions की खरीद पर 18579.3 Cr. रुपये खर्चे   हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के खर्चे के मुकाबले 4107.53 Cr. रुपये अधिक है l 



देश के चोटी के आरटीआई विशेषज्ञों में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बताया कि हालांकि बीजेपी सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुकाबले 3 साल में सेना के आर्म्स एंड एम्मुनिशन पर अधिक खर्चा किया पर यह भी काफी कम था जिसका खुलासा CAG की रिपोर्ट में हुआ l संसद में पेश कैग रिपोर्ट से भारतीय सेना के पास गोला बारूद की कमी के खुलासे के बाद जागी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हालिया वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुरुआती 7 महीनों में 31 अक्टूबर तक  ही 28,303.43 Cr. रुपये खर्च करने के कदम को सही बताते हुए एक्टिविस्ट संजय शर्मा  ने नरेंद्र मोदी पत्र लिखकर देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार सतर्क दृष्टि रखने की अपेक्षा करने की बात एक विशेष बातचीत में इस स्वतंत्र पत्रकार को बताई है l 


Saturday, November 4, 2017

UP: एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने सूचना आयोग पर लगाया पुलिस के साथ साजिश कर RTI आवेदक के खिलाफ अवैध FIR लिखाने का आरोप l

UP: एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने सूचना आयोग पर लगाया पुलिस के साथ साजिश कर RTI आवेदक के खिलाफ अवैध FIR लिखाने का आरोप l

लखनऊ / 04 नवंबर 2017…………………..

 आबादी के हिसाब से भारत के सबसे बड़े सूबे यानि कि उत्तर प्रदेश की तेजतर्रार एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने राज्य के सूचना आयोग और पुलिस विभाग पर  साजिश करके एक  RTI आवेदक के खिलाफ अवैध FIR लिखाने का गंभीर आरोप लगाया है l उर्वशी ने यह आरोप लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन येश्वर्याज की आज की बैठक के बाद लगाया है और जल्द ही इस मामले में येश्वर्याज के प्रतिनिधिमंडल के साथ यूपी के राज्यपाल से मिलकर सूचना आयोग द्वारा RTI आवेदकों के खिलाफ इस तरह की साजिश करने के प्रमाण राज्यपाल को सौंपकर राज्यपाल  द्वारा इस तरह के आरटीआई आवेदकों के उत्पीड़न के गंभीर मामलों  का संज्ञान लेकर आरटीआई एक्ट की धारा 17 के तहत कड़ी कार्यवाही करने की मांग करने की बात कही है l


To download FIR and other related documents, please click the link

येश्वर्याज की संस्थापिका उर्वशी शर्मा ने सभा की अध्यक्षता करते हुए इस चौंकाने वाले समाचार का खुलासा किया है जिसके अनुसार पुलिस विभाग में आरटीआई डालकर अपनी अर्जी पर की गई कार्यवाही पर सूचना मांगना एक RTI  आवेदक को इतना भारी पड़ा है कि  सूचना आयोग के के इशारे पर पुलिस ने  खुद पहल करते हुए  अपने एक  सब इंस्पेक्टर  से तहरीर लेकर  आरटीआई  आवेदक के खिलाफ IPC की धारा 353 और 504 में FIR दर्ज कर ली है और 2 साल से काम सजा के अपराध होने पर भी लगातार आरटीआई आवेदक के घर पर दबिश डालकर उसका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है l



बकौल उर्वशी मामला दरअसल यूं है कि RTI  आवेदक लखनऊ निवासी तनवीर अहमद सिद्दीकी ने साल 2016 में, जब सूचना आयोग इंदिरा भवन में हुआ करता था, सूचना आयोग के एक आयुक्त पर अपने निजी स्टाफ के साथ मिलकर मारपीट और गाली गलौज करने का आरोप लगाया था और इस संबंध में एक अर्जी यूपी के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी थी l  उर्वशी ने बताया कि बाद में तनवीर ने पुलिस महानिदेशक को भेजी इस अर्जी पर पुलिस विभाग द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना मांगी और पुलिस विभाग द्वारा सही सूचना ना दिए जाने पर आयोग में इस मामले की शिकायत सूचना आयोग में दर्ज कराई l आवेदक  की इस आरटीआई अर्जी पर सूचना देने के स्थान पर सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार यादव ने बीते महीने की 30 तारीख को आयोग जाकर आरोपी सूचना आयुक्त के निजी स्टाफ के बयान लिए और पीड़ित तनवीर के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करने की तहरीर  हजरतगंज थाने में दे दी और 30 तारीख को ही हजरतगंज थाने में तनवीर के खिलाफ मुकदमा कायम भी हो गया l


आरटीआई  एक्ट  एक्ट की धारा 21 का हवाला देते हुए देश के प्रख्तात आरटीआई एक्टिविस्टों में शुमार उर्वशी शर्मा ने आरोप लगाया है कि  सूचना आयोग ने लखनऊ पुलिस के साथ पेशबंदी में यह झूंठी FIR लिखाई है l उर्वशी बताते हैं कि  आरटीआई एक्ट की धारा 21 में यह प्राविधानित है कि  कोई वाद अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन सद्भाव पूर्वक की गई है या किये जाने के लिए आशयित है, किसी व्यक्ति के विरुद्ध न  होगी l  बकौल उर्वशी इस FIR की तहरीर में यह स्पष्ट लिखा है की आवेदक तनवीर के खिलाफ यह FIR उनके  द्वारा साल 2016 में सूचना आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत संख्या एस 3 190 सी/2016 की सूचना देने के क्रम में  दर्ज कराई गई है और  पुलिस की इस कार्यवाही को आरटीआई एक्ट की धारा 21 के प्रतिकूल होने के आधार पर अवैध बताया है और इस FIR को
निरस्त कराने की मांग उठा दी  है l


बकौल उर्वशी पीड़ित  के विरुद्ध साल 2016 की 11 जनवरी को  घटित जिस घटना के आधार पर पीड़ित  के खिलाफ 1 साल 9 महीने से ज्यादा का समय हो जाने के बाद यह FIR दर्ज कराई गई है, उस मामले में तनवीर अहमद सिद्दीकी पुलिस थाने,SSP, डीजीपी,शासन-प्रशासन ,सूचना आयोग, मानव अधिकार आयोग आदि को अर्जियां  देने के बाद लखनऊ के सीजेएम न्यायालय में  परिवाद दायर कर चुके हैं और सूचना आयुक्त के साथ साथ उनके स्टाफ के खिलाफ तनवीर की रिवीजन पिटीशन लखनऊ के जिला जज के न्यायालय में सुनवाई पर लगी हुई है और इन दो आधार पर उर्वशी ने तनवीर के खिलाफ लिखाई गई FIR को सूचना आयोग द्वारा पेशबंदी में किया गया एक निंदनीय कार्य बताते हुए सूचना आयोग की इस साजिश की सार्वजनिक भर्त्सना भी की है l



देश के नामचीन एक्टिविस्टों में से एक समाजसेविका उर्वशी प्रश्न करती हैं कि यदि तनवीर के खिलाफ कोई ऐसा अपराध सूचना आयुक्त की उपस्थिति में किया गया था तो सूचना आयोग ने जनवरी 16 से अब तक पौने 2 साल से अधिक का समय हो जाने पर भी इस मामले में विधिक कार्यवाही के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया और आखिर क्यों जब आरोपी सूचना आयुक्त को लखनऊ के जिला जज न्यायालय में अपना अधिवक्ता खड़ा करना पड़ा तब आरटीआई एक्ट  की धारा 21 को धता बता कर सूचना आयोग में प्रचलित शिकायत के आरटीआई आवेदन की विषय वस्तु के आधार पर  यह झूंठी FIR दर्ज कराई है जो एक्ट के अनुसार भी अवैध है l इस मामले में सूचना आयोग की गहरी साजिश का जिक्र करते हुए उर्वशी बताती हैं कि अमूमन पुलिस महानिदेशक कार्यालय से संबंधित सभी मामले मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी द्वारा सुने जाते  हैं लेकिन इस मामले को साजिशन उसी आयुक्त के यहां पंजीकृत किया गया जिसके खिलाफ तनवीर अहमद सिद्दीकी ने आपराधिक आरोप लगाए थे और इस आधार पर मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयोग के रजिस्ट्रार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है l

उर्वशी ने बताया कि वे देश विदेश के शीर्ष आरटीआई कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रही हैं और जल्द ही इस मामले में एक देशव्यापी मुहिम चलकर तनवीर जैसे पीड़ितों को न्याय दिलाने के साथ-साथ सूचना आयोगों के चेहरों पर चढ़े झूंठ और फरेब के मुखौटों को नोंच फेंका जाएगा l 


Friday, October 13, 2017

'एक्टिविस्ट्स को 'RTI रत्न' 2016 से सम्मानित कर NGO येश्वर्याज' ने लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में मनाया 'RTI डे 2017'






लखनऊ/13 अक्टूबर 2017..........

साल 2005 में लागू हुए सूचना का अधिकार कानून के 12 साल पूरे होने के मौके पर यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन 'येश्वर्याज'  ने  12 अक्टूबर 2017 को यूपी के सुदूर जिलों अमेठी,उन्नाव,लखनऊ,फर्रुखाबाद,फतेहपुर,शाहजहांपुर,मऊ ,हरदोई,सुल्तानपुर,बाराबंकी और प्रतापगढ़ से आये सौ से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब के खचाखच भरे हॉल में  आरटीआई कार्यकर्ताओं को 'आरटीआई रत्न' सम्मान दे  कर आरटीआई डे 2017  मनाया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च न्यायालय इलाहाबाद के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमलेश्वर नाथ ने की और नैतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विख्यात अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की ।कार्यक्रम में डा. नीरज कुमार,आलोक चांटिया,नम्रता शुक्ला,पुष्पा अनिल,डा. महिमा देवी के साथ अनेकों अधिवक्ताओं ने भी शिरकत की ।

इस अवसर पर लखनऊ के आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार शुक्ल को 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' प्रथम पुरस्कार;शाहजहांपुर के प्रकाश चंद्र पाठक को 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' द्वितीय पुरस्कार;फर्रुखाबाद के शिव नारायण श्रीवास्तव और फतेहपुर के जय सिंह परिहार को सम्मिलित रूप से 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया ।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सतना जिले के राजीव खरे के साथ-साथ  लखनऊ के विनोद कुमार यादव; आनंद, गणेश यादव और उन्नाव की सरस्वती को मिलाकर 8  एक्टिविस्ट्स को आरटीआई एक्ट का सार्थक प्रयोग करने के लिए 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया ।

कार्यक्रम की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि उनका संस्थान प्रत्येक वर्ष सूचना के अधिकार अधिनियम का प्रयोग कर लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही लाने के लिए सराहनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर 'आरटीआई रत्न' पुरस्कार देता है ।

कार्यक्रम में अगले वर्ष दिए जाने वाले 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न पुरस्कार 2017 के फॉर्म का विमोचन कर इन पुरस्कारों का नामांकन की प्रक्रिया की शुरुआत की गई और कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों को नई दिल्ली की संस्था 'कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव' (CHRI) द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई RTI गाइड और येश्वर्याज की ओर से यूपी आरटीआई नियमावली 2015 की प्रतियों के निःशुल्क वितरण किया गया ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लखनऊ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय ने आरटीआई एक्टिविस्टों के कार्यों की सराहना करते हुए आरटीआई सम्बन्धी सभी मामलों में निःशुल्क विधिक राय देने और आरटीआई एक्टिविस्ट्स के मामलों को संस्था येश्वर्याज के मार्फत निःशुल्क उच्च न्यायालय ले जाने की बात कही ।

अपने अध्यक्षीय भाषण में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस कमलेश्वर नाथ ने येश्वर्याज के आयोजन को सार्थक बताते हुए आयोजिका उर्वशी शर्मा को बधाई दी और एक्टिविस्टों को सलाह दी कि वे सूचना आयुक्तों के गलत आदेशों को उनके खिलाफ अक्षमता का प्रमाण बनाकर राज्यपाल  से शिकायत करें ताकि इस प्रमाणों के आधार पर सही कार्य न करने वाले सूचना आयुक्तों को हटवाकर सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार हो सके ।कमलेश्वर नाथ ने  आरटीआई एक्ट को मजबूती देने से सम्बंधित मुद्दों को अपने स्तर से उठाने की बात भी कही ।


कार्यक्रम में बोलते हुए देश के प्रमुख आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी  शर्मा ने आरटीआई एक्ट लागू होने के बाद 12  सालों में 70  से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या होने,500  से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं का गंभीर उत्पीड़न होने, व्हिसिलब्लोअर कानून लागू न होने,सूचना आयुक्तों की नियुक्तियों में उच्चतम न्यायलय द्वारा नमित  शर्मा मामले में दी गई गाइडलाइन्स का सरकारों द्वारा अनुपालन न करने और सरकारी विभागों द्वारा वेबसाइट्स पर एक्ट की धारा 4 (1 )(b ) की सूचना न डालने, सरकारों द्वारा जनता को प्रशिक्षित करने के लिए बजट न देने और सरकारी अफसरों में आरटीआई एक्ट का ज्ञान न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए एक्टिविस्ट्स को इन एक रणनीति बनाकर मुद्दों पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया ।


कार्यक्रम के अंत में आयोजिका उर्वशी शर्मा ने अध्यक्ष, मुख्य अतिथि और यूपी के अमेठी,उन्नाव,लखनऊ,फर्रुखाबाद,फतेहपुर,शाहजहांपुर,मऊ ,हरदोई,सुल्तानपुर,बाराबंकी और प्रतापगढ़ से आये सैकड़ों एक्टिविस्ट्स को धन्यवाद ज्ञापित किया l  कार्यक्रम का सञ्चालन मानवाधिकार कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने किया ।


Tuesday, October 10, 2017

YAISHWARYAJ's RTI Ratn 2016 Award Ceremony, RTI activists' meet, RTI Awareness Camp, CHRI RTI Guide & UP RTI Rules 2015 distribution.

"RTI day 2017" celebrations by YAISHWARYAJ at Press Club Lucknow on 12 October 2017 From 12:00 Hrs. to 14:00 Hrs.