Sunday, August 20, 2017

एक्टिविस्ट्स का डेथ-वारंट बताते हुए केंद्र और UP की RTI नियमावलियों को जलाकर उठाई गई सुधार की मांग l







लखनऊ/20 अगस्त 2017

2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है ।  लखनऊ की समाजसेविका और सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज’ की सचिव उर्वशी शर्मा का मानना है कि केंद्र और राज्यों की सरकारें जब देश भर के आरटीआई कार्यकर्ताओं के द्वारा बनाए गए जनदबाब के चलते सीधे-सीधे आरटीआई एक्ट में बदलाव करके एक्ट को कमजोर करने के मंसूबों में सफल नहीं हो पाई तो उन्होंने बैकडोर से आरटीआई नियमावलियों की आड़ लेकर RTI एक्ट को कमजोर करने की साजिश रचना शुरू कर दिया है l यूपी के आरटीआई कार्यकर्ता साल 2015 से ही लगातार इस साजिश के शिकार हो रहे हैं और केंद्र की नई आरटीआई नियमावली लागू होने के बाद पूरा देश इस प्रशासनिक साजिश का शिकार होगा l बकौल तनवीर अहमद सिद्दीकी , इसीलिये इन  नियमावलियों के अधिनियम विरोधी प्राविधानों पर विरोध प्रदर्शित करने के लिए सामाजिक  संगठन ‘येश्वर्याज’ ने आगे आकर लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान स्थित धरना स्थल में  नियमावलियों की प्रतियाँ जलाकर धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया है और भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री, मुख्य केन्द्रीय सूचना आयुक्त तथा  यूपी के राज्यपाल,मुख्यमंत्री और  मुख्य सूचना आयुक्त को ज्ञापन भेजकर   इन  नियमावलियों के अधिनियम विरोधी प्राविधानों  को समाप्त करने की माग उठाई है l

धरने में शामिल राम स्वरुप यादव  का मानना है कि इन नियमावलियों में आरटीआई की अर्जी देने वाले की मौत की स्थिति में मामला बंद करने और आरटीआई की प्रक्रिया खर्चीली करने जैसे प्रस्ताव हैं। हरपाल सिंह ने सरकार की इस कोशिश को आरटीआई कानून को बैक डोर से कमजोर करने की साजिश बताते हुए आशंका व्यक्त की है कि  नए बदलावों से आरटीआई के तहत सूचना पाना मुश्किल हो जाएगा।

आरटीआई एक्सपर्ट ज्ञानेश पाण्डेय कहते हैं कि देश की जनता को सूचना पाने का अधिकार काफी जद्दोजहद के बाद हासिल हुआ, लेकिन अब आरटीआई नियमावलियों के नाम पर  आवेदक की मौत होने पर मामला बंद कर देने,आवेदन को अधिकतम 500 शब्दों में देने, आरटीआई की फीस बढाने, पोस्टल खर्च आबेदक पर डालने और आरटीआई अर्जी देने वाले के खिलाफ काउंटर अपील देने का प्राविधान लागू करने से इस एक्ट को लाने की मूल मंशा की ही हत्या हो जायेगी ।

आरटीआई नियमावली में व्हिसिलब्लोअर की सुरक्षा का कोई भी प्रावधान नहीं किये जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अधिवक्ता रुवैद कमाल किदवई  ने इन नियमावलियों को आरटीआई की धार को कमजोर करने वाला, नागरिकों के मुकाबले भ्रष्ट सरकारी अफसरों की ताकत को बढ़ावा देने वाला और आम लोगों के लिए आरटीआई की प्रक्रिया को मंहंगा और जटिल बनाने वाला बताया है।

धरने में आये आरटीआई कार्यकर्ता पुरुषोत्तम शुक्ल, होमेंद्र कुमार, अरविन्द शुक्ल और राजकिशोर यादव भी इस बदलाव से काफ़ी नाराज़ दिखाई दिए और सभी ने सरकार पर आरटीआई क़ानून को कमज़ोर करने का भी आरोप लगाया l कार्यकर्ताओं के अनुसार   सरकार की नीयत साफ़ नहीं है और  उसने आम जनता के लिए सूचना का अधिकार पाना मुश्किल कर दिया है l

धरने में आरटीआई एक्टिविस्ट शमीम अहमद,अधिवक्ता मनीष,आनंद प्रसाद आदि ने प्रतिभाग  किया l कार्यक्रम की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि यदि 3 माह में उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उनका संगठन इस मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर विधिक उपचार लेकर भारत में आरटीआई आन्दोलन को मजबूती देने के क्षेत्र में अपना योगदान देने का प्रयास करेगा  l


Saturday, May 27, 2017

UP : राज्यपाल से भेंटकर RTI activists ने उठाई जनपदीय न्यायालयों में RTI एक्ट लागू करने की मांग l



Lucknow/27 May 2017

बीते कल शाम यूपी के आरटीआई कार्यकर्ताओं के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ की समाजसेविका उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में यूपी के राजभवन जाकर यूपी के राज्यपाल राम नाईक  से भेंट की और उन्हें यूपी के जनपदीय न्यायालयों द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के प्राविधानों का अनुपालन न किये जाने के प्रमाण सौंपते हुए महामहिम से हस्तक्षेप  कर समस्या का समाधान करने की गुहार लगाई l  प्रतिनिधिमंडल ने मिर्जापुर के आरटीआई कार्यकर्ता मनीष कुमार सिंह के उत्पीड़न का प्रकरण भी राज्यपाल के समक्ष रखा और मनीष का उत्पीड़न करने वाले गौतम बुद्ध नगर के जिला जज अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ कार्यवाही की मांग की l


प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं समाजसेविका और सामाजिक संस्था 'येश्वर्याज' की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि आरटीआई कार्यकर्ता मनीष ने उत्तर प्रदेश के सभी जनपदीय न्यायालयों को पत्र लिखकर आरटीआई एक्ट की धारा 4 के बाध्यकारी प्राविधानों को  लागू  करने की मांग की थी l इसके बाद गौतमबुद्ध नगर के जिला जज द्वारा मनीष का उत्पीड़न शुरू कर दिया गया था |बकौल  उर्वशी  इसके बाद मनीष द्वारा राज्यपाल को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई जिस पर राजभवन ने मनीष की समस्या के समाधान के लिए राजयपाल से मिलने की सूचना दी और वे राम नाईक से मिले l उर्वशी ने बताया कि उन्होंने उच्च न्यायालय की अपील प्रक्रिया नियमावली बनाने की मांग भी उठाई है l


उर्वशी ने बताया कि राजयपाल ने प्रतिनिधिमंडल के 8 सूत्री ज्ञापन पर लगभग आधे घंटे तफ्सील से बात की और ज्ञापन अपने मुख्य सचिव के मार्फत सूबे के  मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी को भेजते हुए उत्तर प्रदेश के सभी जनपदीय न्यायालयों द्वारा आरटीआई एक्ट की धारा 4 के बाध्यकारी प्राविधानों को  लागू  कराने और गौतमबुद्ध नगर के जिला जज द्वारा मनीष का कथित रूप से उत्पीड़न किये जाने की जाँच कराकर जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्यवाही कराने में हर संभव मदद का आश्वासन दिया है l

प्रतिनिधिमंडल में पीड़ित आरटीआई कार्यकर्ता  मनीष और उनके छोटे भाई के साथ लखनऊ के मानवाधिकार कार्यकर्ता इं. संजय शर्मा, एडवोकेट  रुवैद किदवई और तनवीर अहमद सिद्दीकी भी शामिल थे l

उर्वशी ने राज्यपाल को नई दिल्ली की संस्था कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव द्वारा उनकी संस्था 'येश्वर्याज' को निःशुल्क वितरण के लिए दी गई हिंदी और अंग्रेजी की RTI गाइड भेंट की जिसे सहर्ष स्वीकार करते हुए नाईक ने आरटीआई को पारदर्शिता और जबाबदेही को लोकजीवन का आवश्यक अंग बताते हुए   RTI गाइड्स को अपने जीवन की महत्वपूर्ण भेंटों में से एक भेंट बताया l


Saturday, May 13, 2017

यूपी : खलनायक बने राजधानी प्रशासन ने नहीं दी येश्वर्याज RTI क्लीनिक की अनुमति l

कैंप अब लखनऊ के हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क के स्थान पर  बर्लिंगटन चौराहे के पास स्थित प्रवीण पेट्रोल पम्प के सामने कैंट रोड स्थित ग्रान्ड मार्किट ( निकट सिटी साइबर कैफ़े) पर स्थित कार्यालय में होगा l  

Friday, May 12, 2017

‘येश्वर्याज RTI क्लीनिक’ का उद्घाटन, RTI जन जागरूकता अभियान 2017 और CHRI,नई दिल्ली की RTI गाइड का निःशुल्क वितरण

‘येश्वर्याज RTI क्लीनिक’ का उद्घाटन,
RTI जन जागरूकता अभियान 2017 और
CHRI,नई दिल्ली की RTI गाइड का निःशुल्क वितरण   
दिनांक : 14 मई 2017 दिन :  रविवार
समय : पूर्वाहन 11 बजे से 5 बजे अपराह्न तक
स्थान : हजरतगंज GPO के निकट स्थित महात्मा गाँधी पार्क 
-: आयोजिका :-
उर्वशी शर्मा ( समाजसेविका एवं RTI एक्टिविस्ट )
मोबाइल नंबर  9369613513 Whatsapp No. 8081898081
-: संसाधन व्यक्ति :-
डा. नीरज कुमार, डा. आलोक चांटिया, इं. संजय शर्मा, रुवैद कमाल किदवई ( अधिवक्ता ),त्रिभुवन कुमार गुप्ता ( अधिवक्ता ),सौरभ यादव ( अधिवक्ता ) , मनीष त्रिपाठी ( अधिवक्ता ), अशोक कुमार शुक्ला ( अधिवक्ता ), मनीष कुमार सिंह ( अधिवक्ता ) , शमीम अहमद
-: सहयोगी संगठन :-
कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव,नई दिल्ली;सूचना का अधिकार बचाओ अभियान ट्रस्ट,लखनऊ और एस.आर.पी.डी. मेमोरियल समाज सेवा संस्थान,लखनऊ    
RTI Helpline : 8081898081    RTI Helpmail :  upcpri@gmail.com
Blog : http://upcpri.blogspot.in/  Twitter @yaishwaryaj Instagram @yaishwaryaj









Tuesday, December 6, 2016

एसएसपी की जांच में फर्जी निकला लखनऊ के तथाकथित पत्रकार महेंद्र अग्रवाल का सोनभद्र के प्रकाशित अखबार कूटचक्र l




















लखनऊ / 06-12-2016

भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक के कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार देश में हिंदी भाषा के समाचार पत्र-पत्रिकाओं के 52050 टाइटल पंजीकृत हैं l जहाँ एक तरफ सामाजिक सरोकारों से अपना जुड़ाव रखने वाले सुधी पत्रकार इनमें से अधिकाँश समाचार पत्र-पत्रिकाओं को देश की जनता की आवाज बनाकर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ कहलाने के अपने नाम को सार्थक करने की पुरजोर कोशिश में शिद्दत से लगे हुए हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में शुचिता बनाए रखने के लिए जबरदस्त जद्दोजहत कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कुछ ‘भेंड़ की खाल में छुपे भेड़ियों’ ने फर्जी  समाचार पत्र-पत्रिकाओं के नाम पर सरकारी और प्राइवेट विज्ञापन लेने जैसे अनेकों  गोरखधन्धे और गैरकानूनी काम फैलाकर पत्रकारिता के क्षेत्र को भी बदनामी के दलदल में घसीटने का काम शुरू कर दिया है l  अब लखनऊ की समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री  उर्वशी शर्मा ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है जिसने तथाकथित पत्रकारों द्वारा फर्जी अखबारों को खड़ा करके इन अखबारों के माध्यम से अपराध किये जाने का खुलासा करने के साथ-साथ भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक द्वारा समाचार पत्र-पत्रिकाओं का पंजीकरण करने और भारत सरकार के विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय द्वारा समाचार पत्र-पत्रिकाओं को विज्ञापन आबंटित करने की प्रणाली की ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह लगाकर इन संस्थाओं को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है l

मामला सोनभद्र का है जहाँ से प्रकाशित होने वाले हिंदी साप्ताहिक अखबार कूटचक्र के फर्जी होने की बात एक पुलिस जांच से सामने आई है l बताते चलें कि सोनभद्र के रहने वाले महेंद्र अग्रवाल का यह हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र बाकायदा भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक के कार्यालय से पंजीकृत है l समाचारपत्रों के पंजीयक की वेबसाइट के अनुसार इस अखबार के पब्लिशर,प्रिंटर,एडिटर और ओनर महेंद्र अग्रवाल हैं जिसका पता अनपरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश है l यह वेबसाइट सोनभद्र, उत्तर प्रदेश में  कूटचक्र के नाम से एक प्रिंटिंग प्रेस का होना भी बताती है जहाँ इस अखबार की छपाई होनी बताई जाती है l

बकौल उर्वशी जब उनकी जानकारी में आया कि यह समाचार पत्र एक पूरी तरह फर्जी और जेबी अखबार है जिसकी मात्र फाइल कॉपी लखनऊ के रहने वाले में ही महेंद्र अग्रवाल द्वारा लखनऊ में ही छाप ली जाती है और महेंद्र अग्रवाल द्वारा कूटरचित प्रपत्र बनाकर सोनभद्र के फर्जी पते पर इस अखबार का पंजीकरण कराया गया है और फर्जी प्रिंटिंग प्रेस से इसका बड़ी संख्या में छपना दिखाकर सरकारी विज्ञापन लेकर सरकार के साथ धोखाधड़ी तो की ही जा रही है साथ ही साथ  लोगों को ब्लैकमेल करने का अपराध  भी किया जा रहा है तो उन्होंने सूबे के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा शुरू किये गए जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा दी l

उर्वशी की शिकायत पर सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक ने अनपरा थाने द्वारा जो स्थलीय जांच कराई है उसमें यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि सोनभद्र जिले में न तो कूटचक्र नाम के किसी अखबार का कोई कार्यालय है, न प्रिंटिंग प्रेस है, न इस अखबार की कोई छपाई होती है और स्थानीय मीडिया को भी ऐसे किसी भी समाचारपत्र की कोई जानकारी नहीं है l यह जांच आख्या थाना अनपरा जिला सोनभद्र के उपनिरीक्षक विनोद कुमार यादव ने बीते  21 नवम्बर को तैयार की है जिसके आधार पर अब उर्वशी ने महेंद्र अग्रवाल को फ्रॉड बताते हुए सोनभद्र के हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र कूटचक्र को पूरी तरह से फर्जी अखबार बताया है l

बकौल उर्वशी पुलिस जांच से यह प्रमाणित हो गया है कि महेंद्र अग्रवाल ने फर्जीबाड़े से कूटरचित अभिलेखों के आधार पर इस जेबी अखबार का सर्कुलेशन 25500 दिखाकर इस फर्जी अखबार के लिए भारत सरकार के विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय से वित्तीय वर्ष 2015-16 में 3708Rs. के और वित्तीय वर्ष 2016-17 में अब तक 7270Rs. के विज्ञापन हासिल करके सरकार के साथ वित्तीय धोखाधड़ी भी की है l

उर्वशी ने बताया कि उनको बताया गया है कि महेंद्र अग्रवाल द्वारा इस फर्जी अखबार कूटचक्र के नाम पर सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों, प्रतिष्ठानों आदि को ब्लैकमेल कर अपने इस अखबार के लिए विज्ञापन लेने के नाम पर धनउगाही की जाती है और ब्लैकमेलिंग के पैसों से इस शातिर कथित पत्रकार ने न केवल लखनऊ के हजरतगंज जैसे पॉश इलाके में आवास बना रखा है अपितु गोमती पार नए लखनऊ की कई कॉलोनियों में फ्लैट भी ले रखे हैं जिनकी जांच आवश्यक है और इसीलिये उन्होंने  326-A, प्रिंस काम्प्लेक्स, हजरतगंज, लखनऊ निवासी  महेंद्र अग्रवाल के खिलाफ  प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर कठोर विधिक कार्यवाही कराने  और अखबार का पंजीकरण तत्काल समाप्त कर विज्ञापन की धनराशि की बसूली कराने की कार्यवाही कराने के लिए प्रार्थना पत्र पुलिस विभाग और सूचना विभाग के अधिकारियों को प्रेषित कर दिए हैं  l

Saturday, January 11, 2014

RTI reply from indian rail uploaded on 110114

RTI reply from indian rail uploaded on 110114







Thursday, May 19, 2011

Airtel: Switch off Diesel

Hi ,

I just signed a petition opposing Airtel's use of dirty diesel energy to power their cell phone towers.

Please read the mail below and take action.

Regards,



Dear friends,

Thanks to the telecommunications sector, every new call and SMS is hurting our environment. Lakhs of massive mobile network towers in our country run on dirty diesel.

Airtel is the market leader and trend-setter of the Indian telecom industry. If we get them to switch to renewable energy, it will set an example for the others to follow. Customers are the mainstay of this industry. Airtel would notice if customers ask them to make their calls green by using clean energy to power company’s mobile towers.

You should ask Airtel to switch to renewable energy.

http://www.greenpeace.org/india/en/What-We-Do/Stop-Climate-Change/Green-Electronics/switch-off-diesel/airtel-switch-off-diesel/

Several current and potential Airtel subscribers, asking them to switch to renewable energy will help put pressure on them to act. Since the company is bound to provide good service to its subscribers, they will not be able to ignore this feedback.

Like coal and nuclear, oil too is an unsustainable energy option. The Deepwater Horizon oil spill last year showed the dangers of our addiction to oil.[2] Studies conducted by the Intergovernmental Panel on Climate Change have shown that renewable energy is capable of powering the world.[3] Airtel needs to realise this and quit dirty energy.

Tell them now.

http://www.greenpeace.org/india/en/What-We-Do/Stop-Climate-Change/Green-Electronics/switch-off-diesel/airtel-switch-off-diesel/

Thanks a billion!

Photo of Abhishek Pratap

Abhishek Pratap
Climate and Energy Campaigner
Greenpeace India


Sources:

1. Dirty Talking? Case for telecom to shift from diesel to renewable, Greenpeace India, May 19, 2011
http://www.greenpeace.org/india/Global/india/docs/cool-it/reports/telecom-report-may-2011.pdf [PDF]

2. BP Oil Spill: How Bad Is Damage to Gulf One Year Later? Time magazine, April 19, 2011
http://news.yahoo.com/s/time/20110419/hl_time/08599206603100

3. Renewable energy can power the world, says landmark IPCC study, Guardian, May 9, 2011
http://www.guardian.co.uk/environment/2011/may/09/ipcc-renewable-energy-power-worldrtimahilamanchup@gmail.com

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